Friday, July 23, 2010

चाहो तो...


चाहो तो गम के हर एक पल में ख़ुशी के आने का पैगाम नज़र आएगा ...
डगमगाता हुआ हर कदम, साथ देने वाले अपनों की एहमियत का एहसास दिलाएगा

चाहो तो अकेलेपन का सन्नाटा भी कानो में मीठा सा गीत गाकर जाएगा ...
इंतज़ार में बिताया आज का हर लम्हा, आने वाले कल में सुनहरी याद बन जाएगा

चाहो तो आंसूँ भी बेहते बेहते मुस्कुराने पर मजबूर कर जाएगा ...
माशा अल्लाह तुम्हारी इस ख़ूबसूरत हसी से भला कौन बच पाएगा :P

3 comments:

  1. wow introduction to the kavitri..
    lovely poem :)

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  2. चाहो तो अकेलेपन का सन्नाटा भी कानो में मीठा सा गीत गाकर जाएगा ...
    इंतज़ार में बिताया आज का हर लम्हा, आने वाले कल में सुनहरी याद बन जाएगा

    nice....

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